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राष्ट्र हित, समाज हित एवं स्वदेशी की विचारधारा वाले एक समान बंधुओं का परिवार

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शुभकामनाएँ
राष्ट्रीय के लिए प्रेम एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया व एक भावना है जो किसी राष्ट्र अथवा देश के लोगों में भाई-चारा , स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग अथवा राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं अपनत्व का भाव प्रदर्शित करती है। देश में राष्ट्रीय एकता लाने के लिये किसी समूह, समाज, समुदाय और पूरे देश के लोगों के बीच एकता को मजबूती देने के लिये ये बढ़ावा देता है।
जब तक किसी राष्ट्र की एकता सशक्त है तब तक वह राष्ट्र भी सशक्त है । बाह्‌य शक्तियाँ इन परिस्थितियों में उसकी अखंडता व सार्वभौमिकता पर प्रभाव नहीं डाल पाती हैं परंतु जब-जब राष्ट्रीय एकता खंडित होती है तब-तब उसे अनेक कठिनाइयों से जूझना पड़ता है ।
मेरा यह मानना है की – “ व्यक्ति राष्ट्र के लिए है राष्ट्र व्यक्ति के लिए नहीं इस दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति अपने राष्ट्र का अभिन्न अंग होता है। राष्ट्र से अलग होकर उसका कोई अस्तित्व नहीं होता है। अत: प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य है कि वह राष्ट्र की दृढ़ता तथा अखंडता को बनाये रखने में पूर्ण सहयोग प्रदान करे एवं राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिए राष्ट्रीयता की भावना परम आवश्यक है। वस्तुस्थिति यह है कि राष्ट्रीयता ही एक ऐसा भाव अथवा शक्ति है जो व्यक्तियों को अपने व्यक्तिगत हितो को त्याग कर राष्ट्र कल्याण के लिए एवं सभी को एक परिवार की तरह रहने के लिए प्रेरित करती है
“हमारा परिवार” ऐसे ही एक समान विचार धारा वाले बंधुओं का समूह है , भारत देश राष्ट्रीय एकता की एक मिशाल है । इतनी भगौलिक एवं सामाजिक विभिन्ताओं के बावजूद हमारा परिवार की एकता राष्ट्रीय एकता का प्रतिक हैं ।
राष्ट्रीयता , सद्भावना एवं स्वदेशी की भावना से औत प्रोत सभी कार्यकर्ताओं को ढेरों शुभकामनाए एवं बधाई |
आपका
डॉ सुरेंदर कुमार
झंडेवाला , दिल्ली